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संकट में सब भक्त हैं,

तुम सोते चुपचाप ।

अब तो उठकर देखिये,

कितना फैला पाप ।।

       

बढ़ते अत्याचार से,

देश रहा है डोल ।

शिवशंकर अब जागिए,

अपनी आँखें खोल ।।


फिर से तुम तांडव करो,

जटा खोल लो आज । 

दुष्टों का विनाश करो,

प्रलय मचा दो आज ॥


ले त्रिशूल प्रहार करो,

कर दो तुम संहार ।

भक्त जनों पर आज ये,

कर दो तुम उपकार ।।

         ✒ विनय कुमार "बुद्ध"