(ताटंक छंद)

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वीणा वादिनी माँ शारदे,

तेरी महिमा गाता हूँ ।

माँ तेरे पावन चरणों में,

अपना शीश झुकाता हूँ ।।


अज्ञान-तिमिर का नाश करो,

अंतस-दीप जला दो माँ ।

हंस वाहिनी कमल आसिनी,

अपना दरस दिखा दो माँ ।।


ज्ञान दायिनी मंगलकरणी,

विधा का वर दो माता।

आशीष-कृपा का हाथ उठा,

मेरे सिर धर दो माता ।।


काम क्रोध मद मोह जलाकर,

उर में प्यार बसा देना।

हे जग तारिणी माँ भारती,

ज्ञान सुधा बरसा देना ।


श्वेत धारिणी पाप नाशिनी,

न्यारी तेरी माया है ।

तेरी कृपा-दृष्टि से माता,

मैंने सब कुछ पाया है ।।

    ✒ विनय कुमार 'बुद्ध'