इक जन्मभूमि इक कर्मभूमि,

दोनों को नमन हम करते ।

इस माटी को लगा के माथे,

हम सबके भाग्य संवरते ।।

 

इक धरती भगवान बुद्ध की,

जहाँ  पे  मैंने जनम लिया ।

कामाख्या की धरा ये पावन,

जिसने मुझको करम दिया ।

 

कृपा अगर इनकी हो जाए,

जीवन नैय्या पार उतरते ।

इक जन्मभूमि इक कर्मभूमि,

दोनों को नमन हम करते ।।

 

इक गंगा- सी पावन धरती,

दूजे ब्रह्मपुत्र की शान लिए ।

जब गीत भिखारी  के गूंजे,

तब सुधा-कंठ यशगान किए ।

 

छठ पावन मनभावन बिहू,

लोगों  में  उमंगे  भरते ।

इक जन्मभूमि इक कर्मभूमि,

दोनों को नमन हम करते ।।

 

कांवर झील और भीम बांध,

राजगीर  की हवा  यहाँ ।

रमणीक धरा  काजीरंगा,

प्राणवायु मानस की जहाँ ।

 

दोनों  की बात निराली है,

जन-मन सब शांत विचरते ।

इक जन्मभूमि इक कर्मभूमि,

दोनों को नमन हम करते ।।

 

वीर कुँवर और चिलाराय,

दोनों ही वीर महान  हैं ।

विद्यापति शंकरदेव जहाँ,

इस धरती के संतान हैं ।

 

गीत प्यार के लिख-लिखकर मैं,

सबको  करता  हूँ  नमस्ते ।

इक जन्मभूमि इक कर्मभूमि,

दोनों को नमन हम करते ।।

         - विनय कुमार बुद्ध