(विधा: चौपाई)

बहन सुता दारा महतारी । 

नारी जगत शक्ति अवतारी ।।

पर उपकार धरा महँ आई । 

नारी महिमा बरनि न जाई ।।


जहँ नारी पाबत दुख नाना । 

सो घर होयहु नरक सामना ।।

जे नर करहि नारि अवमाना । 

काहू न अधम ताहि समाना ।।


घाट-बाट घर-गली लजाई । 

दुष्टन नहीं तजे कटुलाई ।।

रावण बैठहि घात लगावा । 

आपन-आपन सुता बचावा ॥


बैठहु कारन कवन बिचारा । 

नारी भोगत कष्ट अपारा ।।

करहु जतन सब सज्जन भ्राता।

समय रहत चेतहु अब ताता ।।         


हर घर सुता पढ़हि जब आजू । 

करहि प्रगति तब सकल समाजू।

धन्य-धन्य समस्त परिवारा। 

कान्धा देई बनै सहारा ।।

(शब्दार्थ:   सुता=बेटी, दारा=पत्नी)

- विनय कुमार बुद्ध