आफत वाली ठंड से, 

घर में सहमे लोग ।

दुखिया जन लाचार हैं,

आप करे सहयोग ।।


फिक्र पेट की है जिसे, 

कहां मिले परिधान।

आफत की इस ठंड से,

कौन बचाए जान ।।


कपड़े गर्म जमा करें,

रखे हुए बेकार । 

कंबल, स्वेटर, टोपियां,

कर देकर उपकार ।।


जिन्हें दिया भगवान ने, 

खुला रखें वह हाथ।

तत्पर हो कर दीजिए, 

दीन-दुखी का साथ ।।


"विनय बुद्ध" कहता यही,

पर-सेवा है धर्म ।

जग में पंडित है वही, 

जो समझे यह मर्म ।।

विनय कुमार बुद्ध, न्यू बंगाईगांव, असम, फोन: 9435913108