विधा: दोहे

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मंगलमूर्ति गजानना,

सुखकर्ता गणनाथ ।

जग में उसका नाम हो,

तुम हो जिसके साथ ।।


शिव-गौरी के लाल जो,

लम्बोदर कहलाय ।

मन से जो पूजा करे,

भक्त वो बुद्धि पाय ।।


लड्डू जिसकोे प्रिय लगे,

गजानन एकदंत ।

सबपे हो तेरी कृपा,

तेरी कथा अनंत ।।


आज्ञा पालन मातु के,

दीन्हा शीश कटाय ।

वचन दिया जो मात को, 

टूट नहीं वो पाय ।।


चरणों में माँ-बाप के,

बसते चारों धाम ।

दुनियां को यह सीख दी,

बारम्बार प्रणाम ।।


जग में तब से आपकी,

पहली पूजा होय ।

ले आपका नाम शुरू,

काज करे सब कोय ।।


विघ्नहर्ता तुम पर है,

भक्तन को विश्वास ।

बड़ी कृपा हो गर मिले,

शुभ चरणों में वास ।।


गणपति बप्पा मोरया,

गूंजे नभ में आज ।

मूषक पर आ बैठके,

मंगल कर सब काज ।।

              ✒ विनय कुमार बुध्द